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चाय की दुकान फिर प्रिंटिंग प्रेस की नौकरी से राजशाही जीवन तक कैसे पहुँचा। #Vikas_Dubey_Kanpur-Manager-Jai-Bajpai

जय बाजपेई कानपुर नजीराबाद में पहले चाय की दुकान फिर प्रिंटिंग प्रेस में चार हजार की नौकरी से कैसे बना विकास दुबे का ' मनी मैनेजर '

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  जय बाजपेई ऐसी थी ' खजांची नंबर -1 ' की जिंदगी 


कानपुर के ब्रह्मनगर का रहने वाला जय आठ साल पहले नजीराबाद इलाके में चाय की दुकान चलाता था। जिसके बाद कानपुर के ही एक प्रिंटिंग प्रेस में चार हजार रुपये की नौकरी करने लगा। इसी दौरान उसकी मुलाकात विकास दुबे से हुई। दोनों करीबी दोस्त बन गए और विवादित जमीनों की खरीद-फरोख्त करने के साथ ही कई प्रकार के कारोबार करने लगे। इससे कुछ ही वर्षों में जय करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन गया।

दरअसल , विकास दुबे का गांव और जय का गांव आसपास है । जय बाजपेई हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की ब्लैकमनी को वाइट करने का काम करता था । इस काम में उसके तीनों भाई उसका साथ देते थे । जय बाजपेई विकास दुबे का पैसा रियल स्टेट , जमीनों की खरीद फरोख्त , सरकारी जमीनों पर कब्जा करने का काम करता था । जय और उसके भाइयों ने अपराध के जरिए अकूत संपत्ति अर्जित की थी 


उसका रुतबा इतना बढ़ा कि शहर के संभ्रांत लोगों में उसकी पैठ बनने लगी। बता दें कि मंगलवार को एसटीएफ से हटाए गए अफसर अनंत देव तिवारी ने कानपुर का एसएसपी रहते हुए शहर के जिन 10 संभ्रांत (एस-10) लोगों की लिस्ट बनवाई थी उसमें जय वाजपेई का नाम भी शामिल था। सोशल मीडिया पर अनंत देव तिवारी के साथ जय वाजपेई की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। 







उसकी दौलत के पीछे की वह स्याह सी दुनिया अब हर शख्स के सामने है । जानें , जय बाजपेई की पूरी कहानी 

कानपुर बिकरू हत्याकांड के 36 आरोपी सहित जेल में हैं जय बाजपेई। बिकरू कांड के बाद सबसे ज्यादा सुर्खियां विकास दुबे के खजांची जय बाजपेई ने बटोरी हैं । जय बाजपेई की फर्श से अर्श और फिर अर्श से फर्श पर पहुंचने की कहानी बड़ी दिलचस्प है । बिकरू कांड के बाद जय बाजपेई को लोग विकास दुबे ने ' मनी मैनेजर' के नाम से जानने लगे । जय बाजपेई का नाम बिकरू कांड में आने से उसके करीबियों की भी मुश्किलें बढ़ गई ।

5 जुलाई की सुबह विजय नगर चौराहे से जय बाजपेई की तीन लग्जरी कारें लावारिस हालत में पाई गई थीं । इन कारों का इस्तेमाल विकास दुबे और उसके गुर्गों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए होने वाला था । पुलिस की सक्रियता के कारण ये गाड़ियां पकड़ ली गई थीं । यहीं से जय बाजपेई पुलिस की रेडार पर आ गया था ।

 निलंबित किए गए थे पुलिसकर्मी हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का अपराधों में साथ देकर जय बाजपेई ने करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की थी । कानपुर में आठ मकान , फ्लैट , 6 लग्जरी गाड़ियां । यही नहीं , जिस मकान में जय बाजपेई रहता था वह हर तरह की सुख सुविधा से लैस था । विकास दुबे का करोड़ों रुपया जय बाजपेई ने ब्याज में बांट रखा था । उसकी लग्जरी लाइफ स्टाइल देखकर पुलिस महकमे के आलाधिकारी से लेकर थाने के पुलिसकर्मी उसकी आवभगत में लगे रहते थे । 

उसके एक मकान में सिर्फ पुलिसकर्मी रहते थे , जिन्हे बिकरू कांड के बाद निलंबित किया गया था । ब्लैक मनी को वाइट में बदलता था बिकरू हत्याकांड के बाद से विकास दुबे के खजांची जय बाजपेई की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी । बीते 5 सिंतबर को विजय नगर चौराहे से जय बाजपेई की तीन लग्जरी कारें पकड़ी गई थीं । पुलिस की जांच में यह बात निकल कर सामने थी कि तीन कारों का इस्तेमाल विकास दुबे और गुर्गो को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए होने वाला था । 

जब पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि जय बाजपेई हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की ब्लैकमनी को वाइट करने का काम करता था । विकास का पैसा रियल स्टेट , जमीन की खरीद फरोख्त में करता था । इसके साथ जय बाजपेई ने विकास दुबे का करोड़ो रुपया ब्याज में बांट रखा था । फिर गैंगस्टर की हुई थी कार्रवाई हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे ने अपने खजांची जय बाजपेई को बीते 01 जुलाई को फोन कर गांव आने के लिए कहा था । जय बाजपेई अपने साथी प्रशांत शुक्ला के साथ बीते 2 जुलाई की दोपहर बिकरू गांव पहुंचा था । जय बाजपेई ने विकास दुबे को 25 लाइसेंसी कारतूस , रिवॉल्वर और दो लाख रुपए दिए थे । बीते 20 जुलाई को नजीराबाद पुलिस ने प्रशांत शुक्ला और जय बाजपेई को गिरफ्तार कर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा था । जय बाजपेई समेत उसके तीनों भाइयों पर 31 जुलाई को नजीराबाद थाने में गैंगस्टर ऐक्ट की कार्रवाई की गई थी ।


जय के भाइयों ने कोर्ट में किया था सरेंडर जय के तीनों भाई अजयकांत , रजयकांत और शोभित बिकरू कांड के बाद से फरार चल रहे थे । पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिशें दे रही थी । गैंगस्टर की कार्रवाई होने के बाद पुलिस ने तीनों भाइयों पर 25 हजार का इनाम रखा था । पुलिस ने बीते 01 सितंबर को तीनों भाइयों के घर के बाहर मुनादी पिटवाकर 82 की कार्रवाई का नोटिस चस्पा किया था । बीते 4 सितंबर को अजयकांत , रजयकांत और शोभित ने कानपुर की गैंगस्टर कोर्ट में अधिवक्ताओं की पोशाक में कोर्ट में सरेंडर किया था ।

 जब्त कर ली गई ' काली कमाई कानपुर पुलिस ने जय बाजपेई और उसके भाइयों द्वारा अर्जित की गई संपत्ति को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की थी । इसमें जब्तीकरण को लेकर भी विवरण दिया गया था और यह कहा गया था कि जय और उसके भाइयों ने अपराध के जरिए संपत्ति अर्जित की गई है । पुलिस ने रिपोर्ट बनाकर डीएम आलोक तिवारी को सौंपी थी । इस रिपोर्ट पर डीएम ने संपत्ति जब्त करने का आदेश दे दिए थे । इन संपत्तियों में 8 भवन व भूखंड , 5 बाइकें , एक स्कूटी और 6 लग्जरी कारें शामिल थीं । जिला प्रशासन ने जय बाजपेई की संपत्ति को जब्त कर लिया था ।

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