[ कई दशक पूरानी है ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में पुलिस और आरटीओ कर्मचारियों की भूमिका ]
हरेंद्र यादव की याचिका पर हाई कोर्ट ने कहा “थाने अब व्यावसायिक गतिविधियों की जगह बने”
6AM NEWS TIMES, Published by & Updated by : Ravindra yadav, Sun, 03, Agu, 2026, 11:26 AM IST
कैसे रसड़ा थाने के उपनिरीक्षक शिव मूर्ति तिवारी ने मिलीभगत से एआरटीओ को फर्जी रिपोर्ट भेज हरेंद्र यादव के ट्रक को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया और उसके हस्तांतरण पर रोक लगा दी गई।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस में व्याप्त भ्रष्टाचार और पुलिसकर्मियों की व्यावसायिक गतिविधियों में संलिप्तता पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रदेश के थाने अब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के केंद्र नहीं, बल्कि व्यावसायिक गतिविधियों का स्थान बनते जा रहे हैं।
कोर्ट ने बलिया के रसड़ा थाने में तैनात कांस्टेबल संतोष कुमार पर ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय चलाने और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उसे संरक्षण दिए जाने के मामले को गंभीर भ्रष्टाचार का मामला माना।
जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने डीजीपी और अपर मुख्य सचिव (गृह) को पूरे मामले की जांच कर रसड़ा थाने में तैनात सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया. साथ ही डीजीपी को 10 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई का हलफनामा कोर्ट में दाखिल करने का आदेश दिया गया है।
देखा जाए तो पुलिसकर्मियों और परिवहन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से चलने वाले अवैध बस और टैक्सी संचालन (डग्गामारी), अवैध वसूली यूपी क्या देश के लगभग सभी छोटे बड़े शहरों में बीते कई दशकों से बेखौफ़ जारी है
अवैध संचालन और मिलीभगत के मुख्य कारण है ।
साठगांठ और संरक्षण: थानों और चौकियों के नजदीक (जैसे लखनऊ में पॉलीटेक्निक या कमता चौराहा) खुलेआम बिना परमिट के प्राइवेट वाहन और बसें संचालित होती हैं, जिन्हें स्थानीय पुलिस व परिवहन अमले का कथित संरक्षण मिलता है।
प्रशासनिक और दंडात्मक कार्यवाही।
ऐसा नहीं है कि इनके खिलाफ समय-समय पर संयुक्त चेकिंग अभियान: शासन के निर्देश पर परिवहन विभाग और यातायात पुलिस द्वारा समय-समय पर 'ऑपरेशन कवच' जैसे विशेष अभियान चलाकर अवैध व परमिट शर्तों का उल्लंघन करने वाली बसों को सीज किया जाता है। कई बार पुलिसकर्मियों पर निलंबन और एफआईआर जैसी सख्त कार्रवाई भी होती है।
मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।
मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी. यह आदेश हरेंद्र यादव की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि बलिया के सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने उनके ट्रक को मनमाने ढंग से ब्लैकलिस्ट कर दिया.
याचिका में यह भी दावा किया गया कि रसड़ा थाने में तैनात कांस्टेबल संतोष कुमार ने अपने जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) खाते से पैसे निकालकर हरेंद्र यादव के नाम पर एक ट्रक खरीदा था।
सुनवाई के दौरान सामने आया कि रसड़ा थाने में तैनात कांस्टेबल संतोष कुमार ने अपने जीपीएफ से धन निकालकर याची हरेंद्र यादव के नाम पर एक ट्रक खरीदा था। दोनों के बीच ट्रांसपोर्ट का कारोबार शुरू किया गया लेकिन बाद में व्यावसायिक विवाद होने पर पुलिस विभाग के प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि रसड़ा थाने के उपनिरीक्षक शिव मूर्ति तिवारी ने एआरटीओ को रिपोर्ट भेजी, जिसके आधार पर ट्रक को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया और उसके हस्तांतरण पर रोक लगा दी गई।
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