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Allahabad_High_Court : जिला कोर्ट के कोरोना गाइडलाइन जारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्चुअल सुनवाई का फैसला लिया वापस 

जिला कोर्ट के लिए भी जारी हुए कोरोना गाइडलाइन के नियम

www.6amnewstimes.com 6एएम नेटवर्क, रविंद्र यादव, लखनऊ 04: 01: 2022 / 05:55 am



इलाहाबाद हाईकोर्ट में वर्चुअल हियरिंग के आदेश को वापस ले लिया है । 4 जनवरी से वर्चुअल के साथ ही साथ मुकदमों की फिजिकल हियरिंग भी होगी । वर्चुअल हियरिंग का आदेश रविवार को रजिस्ट्रार जनरल ने जारी किया था । इस आदेश का अधिवक्ताओं और बार एसोसिएशन ने विरोध किया था । साथ ही चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को ज्ञापन भी दिया था । इसके बाद सोमवार को यह आदेश बदल दिया गया । आदेश बदलने के बाद हजारों अधिवक्ताओं ने राहत की सांस ली है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सभी अधीनस्थ कोर्ट के लिए भी आदेश जारी किया है । हाईकोर्ट ने कहा है कि सभी पीठासीन अधिकारी सोशल डिस्टेंसिंग के दिशा - निर्देशों को सख्ती से लागू करें । कोर्ट रूम में एक बार में वकीलों की संख्या 10 से ज्यादा न हो । कोर्ट रूम उचित दूरी के साथ 6 कुर्सियों की व्यवस्था ही की जाएगी । इसके अलावा पीठासीन अधिकारी को कोर्ट में व्यक्तियों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने की शक्ति होगी । साथ ही कहा गया है कि कोर्ट कैंपस का सैनिटाइजेशन चिकित्सा दिशा - निर्देशों के अनुसार किया जाना चाहिए । जिला न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट, अन्य प्रशासनिक अधिकारियों और सीएमओ / सीएमएस की मदद से पूरे कोर्ट परिसर की सफाई सुनिश्चित किया जाए। 

अधिवक्ताओं ने कि थी महापंचायत की घोषणा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव और अधिवक्ता अभिषेक शुक्ला ने इस आदेश का विरोध किया था। उन्होंने इसके विरोध में इलाहाबाद हाईकोर्ट के गेट नं 3 के पास महापंचायत की घोषणा की थी। एडवोकेट अभिषेक शुक्ला का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने 2 जनवरी को आदेश दिया था। जिसमें कहा गया था कि 3 जनवरी से हाईकोर्ट में न्यायिक व्यवस्था सिर्फ वर्चुअल हियरिंग से ही चलेगी। अभिषेक का कहना है कि ऐसी व्यवस्था न्याय के लिए ठीक नहीं है । इसीलिए इसके विरोध का निर्णय लिया गया था । इससे आम अधिवक्ताओं और आम वादकारी तक सुचारु और शुलभ न्याय पहुंचाना असंभव है ।

पिछले साल भी कोरोना की दूसरी लहर में केवल ऑनलाइन हियरिंग की व्यवस्था से ज्यादातर अधिवक्ता साथी वकालत छोड़कर अपने गांव लौटने को मजबूर हो गए थे। यह लोकतंत्र में न्यायिक व्यवस्था के ऊपर बड़ा सवाल है। रजिस्ट्रार जनरल के आदेश से वकालत कर अजीविका चलाने वाले हजारों अधिवक्ताओं को फिर आर्थिक संकट से गुजरना पड़ेगा। यह संवैधानिक, अन्यायपूर्ण और अधिवक्ताओं के हितों के खिलाफ है। इसीलिए महापंचायत की घोषणा की गई थी।

चीफ जस्टिस का फैसला स्वागत योग्य

अब जबकि चीफ जस्टिस ने ऑनलाइन के साथ फिजिकल हियरिंग की भी व्यवस्था दे दी है, तो यह स्वागत योग्य है। ऐसे अधिवक्ता जो सुविधा संपन्न नहीं हैं या ग्रामीण क्षेत्रों से आकर वकालत करते हैं, उन्हें फिजिकल हियरिंग होने से कोई आर्थिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा ।


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