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up panchayat Chunav ; सरकार ने अपनी सुविधा के अनुसार आरक्षण के चार फॉर्मूले किए तैयार।

योगी सरकार ने अपनी सुविधा के हिसाब से आरक्षण के चार फॉर्मूले किए तैयार, 20 फरवरी के बाद... 

सब्सक्राइब करें। www.6amnewstimes.com Ravindra Yadav lucknow :01:2021


भाजपा और यूपी सरकार दोनों का मानना है कि पिछले चुनाव में आरक्षण सपा सरकार ने अपनी सुविधा के हिसाब से करवाया था इसलिए पुराना फॉर्मूला नहीं चलेगा।

उत्तर प्रदेश में होने जा रहे त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण का नया फॉर्मूला ही लागू होगा। हालांकि यह फॉर्मूला भी चक्रानुक्रम पर ही आधारित होगा। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पंचायतीराज विभाग ने प्रदेश सरकार को चार फॉर्मूलों का एक प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है। इन्हीं में से किसी एक फॉर्मूले पर योगी सरकार को निर्णय लेना है।

 फिलहाल यह तय हो गया है कि इस नये फॉर्मूले से ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्य और ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष यानि यह सभी छह पद प्रभावित होंगे। बताते चलें कि वर्ष 2015 में हुए त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव में तत्कालीन सपा सरकार ने ग्राम पंचायतों के सदस्य व ग्राम प्रधान की सीटों का आरक्षण शून्य घोषित कर उसे नये चक्रानुक्रम के हिसाब से करवाया गया था। 

मौजूदा सत्तारूढ़ भाजपा और प्रदेश सरकार दोनों का ही यह मानना है कि पिछले चुनाव में पंचायत चुनाव का आरक्षण तत्कालीन प्रदेश सरकार ने अपनी सुविधा के हिसाब से तय करवाया था इसलिए इस बार चक्रानुक्रम का पुराना फॉर्मूला नहीं चलेगा।

20 फरवरी के बाद सार्वजनिक होगा फॉर्मूला। 

यह भी जानकारी में आया है कि आरक्षण का यह नया फॉर्मूला आगामी 20 फरवरी के बाद ही सार्वजनिक किया जाएगा । 👉  क्योंकि प्रदेश सरकार ने अब पंचायत चुनाव अप्रैल व मई के महीनों में करवाने का मन बना लिया है। अब यह तय किया गया है कि होली के ठीक पहले यानि मार्च के बाद किसी भी दिन पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी और अप्रैल व मई के महीनों में त्रि-स्तरीय चुनाव की पूरी प्रक्रिया सम्पन्न करवायी जाएगी।

चार चरणों में ही होगा चुनाव। 

राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों का कहना है कि पूरे प्रदेश में चार चरणों में ही चुनाव होगा। एक जिले के सभी विकास खंडों को चार हिस्सों में विभाजित करके एक-एक हिस्से के नामांकन दाखिले और मतदान की तारीखें तय की जाएगी। एक हिस्से के मतदान से दूसरे हिस्से के मतदान में तीन दिन का अंतर होना चाहिए।



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