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 यूपी पंचायत चुनाव 2021 : एकाएक मौजूदा ग्राम प्रधानों पे होने लगी भ्रष्टाचारो की जांच की बरसात, जानिए वजह.... 

रविंद्र यादव : 6 एएम न्यूज़ टाइम्स लखनऊ, 9415461079 ; 02 :12 :2020 

  

 

पंचायत चुनाव के आहट मात्र से ही सरपंचों पर भ्रष्टाचार के आरोपों की बौछार बढ़ गई है। अचानक लगभग 50 से 60 फीसद ग्राम पंचायतों की शिकायत बढ़ने से पंचायत रोज विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पशोपेश में हैं। वहीं दूसरी ओर विकास के साथ ही अफसरों पर शिकायतों को दूर करने का दबाव बढ़ गया है।


ग्राम प्रधान समेत सभी पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 25 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। निर्वाचन आयोग ने वोटरलिस्ट के पुनरीक्षण का कार्यक्रम भी लगभग घोषित कर दिया है। आयोग के कार्यक्रम के अनुसार दिसंबर तक वोटर लिस्ट जारी करने की संभावना है। 2015 में नौ अक्टूबर से नौ दिसंबर के बीच चुनाव प्रक्रिया पूरी हुई थी। नौ नवंबर को अधिसूचना जारी हुई थी। ऐसे में साफ है कि अगले साल मई-जून तक पंचायत चुनाव होने की संभावना है। 

पंचायत चुनाव के नजदीक पहुंचने से पहले ही गांवों में राजनीति गरम हो गई। प्रधान के कार्यों से असंतोष रखने वालों और प्रधानों के दबंगई सं तंग आने वाले ग्रामीणों ने अपने-अपने सरपंचों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शौचालय, मनरेगा, आवास, सड़क नाली आदि में घोटालों को लेकर शिकायतों का दौर शुरू हो गया है। यही नहीं कुछ तो प्रधान की दबंगई से भी परेशान है। पिछले सालों की तुलना में अचानक शिकायतें बढ़ने के बाद से अधिकारी इसके निपटारे में लगे हुए है। ग्रामीण विभाग में शिकायतों के साथ ही सीएम व डीएम पोर्टल पर भी शिकायत कर रहे है। जिसके बाद से उच्चाधिकारी की जवाबदेही तय हो जाती है। ऐसे में अधिकारी इन दिनों गांव के विकास पर कम और शिकायतों के निस्तारण पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

इस तरह की आ रही शिकायतें : 

विकास खंड गंगीरी के ग्राम पचौरी छबीलपुर निवासी राघव ने ग्राम प्रधान पर 35 हजार रुपये सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। कहा कि प्रधान गांव के विकास पर कम खुद के विकास पर ध्यान ध्यान दे रहे है। इनकी जांच होनी चाहिए। कई विकास खंड में ग्राम प्रधानों पर दबंगई का आरोप लगा है। कहा कि प्रधान ने शौचालय और मनरेगा कार्य में घोटाला कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। इसमें गांव के अफसर भी सम्मिलित हैं। इसकी भी जांच होनी चाहिए। विकास खंडों में गांव के प्रधान द्वारा शौचालय निर्माण में धांधली का आरोप लगाया जा रहा है। कहा जाता है कि प्रधान ने शौचालय निर्माण में काफी अनियमितता बरती है। इसकी जांच कराई जाए।


पारुल सिसौदिया, डीपीआरओ ने बताया कि ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल दिसंबर माह में समाप्त हो रहा है। ऐसे में पंचायत चुनाव जल्द ही होने है। पंचायत चुनाव के आहट मात्र से ही गांव के प्रधानों के द्वारा भ्रष्टाचार करने की शिकायतों आनी शुरू हो गई है। शिकायतें पहले भी आती थी। मगर इस समय शिकायतों की संख्या में काफी इजाफा हो गया हे। इन शिकायतों के निस्तारण समय से किया जा रहा है।



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