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Irrigation Department ; सिंचाई विभाग द्वारा संचालित सिंचाई पाठशालाओं व जल उपभोक्तासमितियों के प्रयासो से बढ़ा है कृषि उत्पादन।

सिंचाई विभाग एवं उपभोक्तासमितियों के प्रयासो को मिली बड़ी सफलता कृषि उत्पादनों मे उल्लेखनीय बढोत्तरी। 

6AM NEWS TIMES Lucknow 23:10: 2020 


यूपी. डब्ल्यू. एस. आर. पी. द्वारा संचालित सिंचाई पाठशालाओं व जल उपभोक्तासमितियों के प्रयासो से बढ़ा है  कृषि उत्पादन। 

👉  गेंहू में , 37 धानमें 43 , एवं दलहनी फसलों में 7.35 व तिलहन फसलों 9 .50 कु0हे0 हुआ है उत्पादन।तथा 222 प्रतिशत फसल सघनता अर्जित कर बनाया है नया कीर्तिमान।


यूपी. डब्ल्यू. एस. आर. पी. सिंचाई विभाग की विश्वबैंक पोषित परियोजना  के तहत परियोजना जनपदों में घटक ‘डी’ कृषि विभाग एवं विश्व कृषि एवं खाद्य संगठन (एफ0ए0ओ0) के सहयोग से संचालित ,4000 किसान सिंचाई विद्यालयों एवं निर्वाचित 1585जल उपभोक्ता समितियों के योगदान से परियोजना जनपदों में कम जल से अधिक फसल उत्पादन करने की उन्नत तकनीकी पर आधारित फसल प्रदर्शनों के परिणामों ने यह सिद्ध कर दिखाया है कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।

इन सफल परिणामों की जानकारी देते हुए पैक्ट के मुख्य अभियंता वारिस रफी ने बताया कि परियोजना की अनुश्रवण एवं मूल्यांकन परामर्शी ,वाप्कोस के टीम लीडर डॉ.वी.पी सिंह की प्रस्तुत प्रगति आख्या के अनुसार परियोजना के जनपदों मे पहले गेहूं, धान और दलहनी व तिलहनी फसलों का उत्पादन क्रमश 25, 29, 05, 07 कु0 प्रतिहेक्टेयर था। वर्ष2019-20 की क्राप कटिंग के अनुसार यह उत्पादन बढ़कर गेंहू, धान और दलहनी व तिलहनी फसलों का क्रमश: 37 ,43, 7.35 एवं 9 .50 कु0 प्रति हेक्टेयर होगया है जोअपनेआप में एक सराहनीय कीर्तमानहै।

मुख्य अभियन्ता, पैक्ट के अनुसार कुलाबा स्तर पर संचालित फार्मर वाटर स्कूल /सिंचाई जल विद्यालय (पाठ शाला) जिनके प्रबंधन में जल उपभोक्ता समितियों के पदाधिकारी पदेन नामित होते है। इनके संयुक्त प्रयासों से कृषि वैज्ञानिक तकनीकी प्रशिक्षण के साथ साथ किसानों के व्यवहारिक ज्ञान वर्धन हेतु खेतों में आदर्श फसल प्रदर्शनों का भी आयोजन कराते हैं। इन प्रदशर्नों के परिणामों को आंकने के लिए कृषि विभाग द्वारा जनपदों में अनुभवी विषय विशेषज्ञों की कमेटियों का गठन किया गया था।

जिसके अनुश्रवण हेतु पैक्ट विषेशज्ञों का एक दल अध्यक्ष, पैक्ट के द्वारा नामित कर क्षेत्रों मेंभेजा गया था। 

इन में राजेश शुक्ला अधिशासी अभियन्ता (पिम मामलों के विषेशज्ञ), पी.के. सत्संगी, अधिसाषीअभियन्ता प्रशासक / विषेशज्ञ, एम ,आई एस. सर्बेक्षण /  दुष्यंत कुमार विशेषज्ञ अनुश्रवण , एस.पी.शुक्ला, कृषि अर्थशास्त्र विषेशज्ञ, उदय प्रताप सिंह समाज शास्त्र विषेशज्ञ आदि अधिकारियों द्वारा समय-समय पर अनुश्रवण किया गया।

वाप्कोस टीम लीडर डॉ सिंह ने यह भी बताया कि इसी प्रकार फसल सघनता (क्रॉप डेनसिटी)में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। आप ने बताया कि सुदूर संवेदन उपयोग केन्द्र उ.प्र.(आर.एस.ए.सी.) के आंकलन के अनुसार परियोजना क्षेत्र मे फसल सघनता 222% अर्जित की गयी है जो अभूतपूर्व है। डॉ.सिंह के अनुसार परियोजना से जहाँ कृषि उत्पादन मे लगभग दुगुनी प्रगति आंकी जा रही है वहीं नहरों का पुनर्निर्माण डैम्स का आधुनिकीकरण बाढ़ पूर्व अनुमान प्रणाली ,विकसित कर जलसंसाधनों का उन्नयन करते हुए जल उत्पादकता मे भी सराहनीय वृद्धि की है।इसके लिए पैक्ट प्रशासन के साथ साथ विश्व बैंक, भारत सरकार और उ.प्र.सरकार के प्रयास भी निस्संदेह प्रशंसनीय हैं।



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