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यूपी में मॉब लिंचिंग : 7 साल में 50 लोगों पर टूटा भीड़ का कहर , 11 लोगों की हुई मौत , पुलिसवाले भी भीड़ का निशाना बने

6AM NEWS TIMES 


लखीमपुर खीरी जिले में पूर्व विधायक की हत्या के बाद आक्रोशित लोगों को समझाता दरोगा । रविवार को लखीमपुर खीरी में पूर्व विधायक की मॉब लिंचिंग से एक बार फिर यूपी की कानून व्यवस्था पर उठे सवाल यूपी लॉ कमीशन ने साल 2019 में सीएम योगी को सौंपी थी अपनी रिपोर्ट , विशेष कानून बनाए जाने की मांग की थी उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में रविवार की दोपहर जमीन के विवाद में विपक्षी गुट ने पीट पीटकर पूर्व विधायक निर्वेद्र कुमार मिश्र की हत्या कर दी । 

यूपी में मॉब लिंचिंग का यह पहला मामला नहीं है । 

उत्तर प्रदेश विधि आयोग ( यूपी लॉ कमीशन ) की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2012 से 2019 तक 50 घटनाएं सामने आईं , जिनमें 50 लोग भीड़ का शिकार बने । इनमें से 11 लोगों की मौत हुई थी । जुलाई , 2019 में आयोग अध्यक्ष रिटायर्ड जज एएन मित्तल ने 128 पन्नों वाली अपनी रिपोर्ट सीएम योगी को सौंपते हुए विशेष कानून बनाने की पैरवी की थी । पुलिसवाले भी बने निशाना मॉब लिंचिंग का शिकार सिर्फ आम लोग ही नहीं बल्कि पुलिसवाले भी होते हैं । साल 2018 में तीन दिसंबर को कथित गोकशी के बाद बुलंदशहर के स्याना कोतवाली क्षेत्र में हिंसा की आग भड़की थी । इस दौरान भीड़ ने स्याना कोतवाली प्रभारी सुबोध कुमार सिंह ने पीट - पीट कर उनकी हत्या कर दी थी । इस दौरान भीड़ ने उन्हें गोली भी मार दी थी । इसके अलावा एक अन्य युवक भी मारा गया था । इसके बाद पिछले साल नागरिकता संशोधन कानून और हाल के महीनों में लॉकडाउन के दौरान झांसी , बरेली , रामपुर , फर्रुखाबाद , उन्नाव , कानपुर , मुजफ्फरनगर जिले में पुलिसवालों पर हमला किया गया ।

👉 ये रहे चर्चित मामले 

 28 सितंबर 2015 : गौतमबुद्धनगर जिले के दादरी में 52 साल के मोहम्मद अखलाक को बीफ खाने के शक में भीड़ ने ईंट और डंडों से मार डाला था । 

27 अगस्त 2019 : मेरठ में भीड़ की तरफ से बच्चा चोरी के अफवाह में एक आदमी की पिटाई कर दी गई थी । पुलिस ने मामला दर्ज कर आठ लोगों को गिरफ्तार भी किया था । इसके अलावा करीब 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था । 

26 अगस्त 2019 : गाजियाबाद में अपने पोते के साथ शॉपिंग करने आई एक महिला की बच्चा चोर बताकर उसकी जमकर पिटाई की गई थी । कुछ युवकों ने महिला को देखकर बच्चा चोर बताया और देखते ही देखते लोगों की भीड़ ने उसे घेर लिया था । महिला से कुछ पूछे बगैर ही लोगों ने उसे पीटना शुरू कर दिया था । 

पूर्व डीजीपी ने कहा- अफसरों को छूट पर अपराध पर नियंत्रण नहीं पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का कहना है कि मौजूदा समय में पुलिसिंग नहीं हो रही है । ऐसी घटनाओं को लेकर कई सख्त कानून है । लेकिन आठ घंटे की पुलिसिंग करके ऐसा नहीं हो सकता । 24 घंटे की पुलिसिंग करना होगा।मॉब लिंचिंग रोकने के लिए थाने में विवाद रजिस्टर , सम्पत्ति विवाद रजिस्टर जैसे तमाम रिकॉर्ड होते हैं । थानाध्यक्ष दोनों पक्षों को बुलाकर कहते हैं कि अगर किसी ने कुछ किया तो कठोर कार्रवाई होगी । बीट पुलिसिंग खत्म हो चुकी है । इधर उधर से नेताओं के आगे पीछे घूमने से पुलिसिंग व्यवस्था नहीं सुधरने वाली है । अफसरों को छूट मिली इसके बाद भी बदमाशों के ऊपर नियंत्रण नहीं है । एक एमएलए के साथ धक्का मुक्की कैसे हो गई यह बड़ा सवाल खड़ा करता है ।

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