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Prayagraj : आबादी पर बाढ़ का खतरा और गहराया, गंगा-यमुना में आ रहा 26 लाख क्यूसेक पानी......... ।

प्रयागराज: आबादी पर बाढ़ का खतरा और गहराया, गंगा-यमुना में आ रहा 26 लाख क्यूसेक पानी

6AM NEWS TIMES : Edited by. Karishma Ganguli, 25, Aug, 2022 : Thu, 08 : 25 PM



प्रयागराज, करिश्मा गांगुली के साथ : संगम नगरी जिस बात की आशंका थी आखिरकार वहीं हुआ। गंगा और यमुना ने बीते 24 घंटे के दौरान ऐसी रफ्तार पकड़ी कि शहर का आधा हिस्सा बाढ़ की चपेट में प्रयाग की पहचान गंगा जमुना नदियों के जलस्तर में देखते ही देखते एक मीटर से ज्यादा की वृद्धि हो गई। दोनों ही नदियों के पानी में जिस रफ्तार से जलस्तर में वृद्धि हो रही है उससे यही माना जा रहा है कि खतरे का निशान बृहस्पतिवार या शुक्रवार तक पार हो जाएगा। नदियों में बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए  प्रयागराज के लिए एनडीआरएफ की 36 सदस्यीय टीम भी यहां पहुंच चुकी है।

प्रयागराज : तेजी से बढ़ा गंगा और यमुना नदी का जलस्तर, संगम नगरी पर मंडराया बाढ़ का खतरा। 

प्रयागराज, 6AM NEWS TIMES । यूपी के कई जिलों में बाढ़ का प्रकोप जारी है। संगम नगरी में भी गंगा और यमुना नदी का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। यहां दोनों नदियां तकरीबन 3 से 4 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है। हालांकि दोनों नदियां अब भी खतरे के निशान से करीब डेढ़ मीटर नीचे ही है।


जलस्तर अगर इसी तेजी के साथ बढ़ा तो संगम नगरी में बाढ़ आने का खतरा साफ़ मंडरा रहा है। अगर नदियां इसी रफ्तार से बढ़ती रहे तो दो दिनों बाद यहां खतरे का निशान पार हो सकता है. हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि देर रात से नदियों के बढ़ने की रफ्तार धीमी हो सकती है। दोनों नदियों में पानी बढ़ने का कारण मध्य प्रदेश व दूसरी जगहों की नदियों से छोड़े गए पानी को बताया जा रहा है।



नदियों का जलस्तर बढ़ने से गंगा किनारे के कई तटीय इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। तमाम सड़कें और रास्ते बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। कुछ मोहल्लों में बाढ़ का पानी घरों में घुसने लगा है। इससे लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है.


एमपी राजस्थान हरियाणा दिल्ली एनसीआर से आ रहे पानी से यमुना का जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है। इन राज्यों में बांधों व बैराजों से लगभग 20.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। संगम नगरी में गंगा और यमुना खतरे का निशान पार कर सकती हैैं।गंगा में उफान की खास बातें



-09 लाख क्यूसेक पानी चंबल नदी से तथा साढ़े सात लाख क्यूसेक केन व बेतवा आ रहा पानी

02 दर्जन मोहल्ले तथा 100 से ज्यादा गांव बाढ़ के पानी से घिरे, शहर में बने 15 राहत शिविर


मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली एनसीआर और उत्तराखंड से आ रहा पानी


प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मजिस्ट्रेट तैनात, नावें और स्टीमर भी लगीं। 

 मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली एनसीआर से आ रहे पानी से यमुना का जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है। इन राज्यों में स्थित बांधों व बैराजों से लगभग 20.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जो यमुना में आ रहा है। इसी तरह उत्तराखंड से विभिन्न बांधों व बैराजों से छह लाख क्यूसेक पानी गंगा में आ रहा है। इससे संगम नगरी में गंगा और यमुना खतरे का निशान पार कर सकती हैैं। इसको लेकर जिला प्रशासन की ओर से तटीय क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। शहर के बंधों व तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी गई है। नदियों के किनारे 15 बाढ़ राहत शिविर क्रियाशील कर दिए गए हैैं। तटीय इलाकों में 98 बाढ़ राहत चौकियां भी स्थापित कर दी गई हैैं, जहां नाव व कुछ स्थानों पर स्टीमर भी लगा दी गई हैैं।

सिंचाई विभाग बाढ़ खंड के अधिकारियों के मुताबिक केन नदी से 3.5 लाख क्यूसेक, बेतवा से माताटीला बांध के जरिए चार लाख क्यूसेक, चंबल नदी का पानी धौलपुर बांध से नौ लाख क्यूसेक तथा यमुना नगर स्थित हथिनीकुंड बैराज से चार लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इस पानी का असर बुधवार से प्रयागराज में व्यापक तौर पर दिखाई पडऩे लगा है। इसके कारण ही यमुना का जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है। उधर, उत्तराखंड में हो रही तेज वर्षा के चलते हरिद्वार व कानपुर बैराज से तथा नरोरा बांध से लगभग छह लाख क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा जा रहा है। इससे दोनों नदियां उफान पर हैैं।

बुधवार शाम गंगा का जल स्तर 83 मीटर तथा यमुना का जल स्तर 82.87 मीटर रिकार्ड किया गया। जिले में खतरे का निशान 84.73 मीटर पर है। आशंका जताई जा रही है कि दोनों नदियां खतरे के निशान को पार कर सकती हैैं। तटीय क्षेत्रों में जिला प्रशासन की ओर से व्यवस्था की जा रही है। बाढ़ प्रभावित लोगों को बाढ़ राहत शिविर में ले आने की कोशिश शुरू हो गई है।


बाढ़ के पानी से घिरे ये मोहल्ले, दो लाख की आबादी चपेट में। 


शहर के नेवादा, राजापुर, गंगा नगर, द्रौपदी घाट, बेली, म्योराबाद, मेंहदौरी, शंकरघाट, चांदपुर, सलोरी, कैलाशपुरी, ढरहरिया, छोटा बघाड़ा, गोविंदपुर, बड़ा बघाड़ा, शिवकुटी, चिल्ला, सादियाबाद, दारागंज, ककरहा घाट, सदियापुर, बक्शी मोढ़ा, करैलाबाग आदि मोहल्ले बाढ़ के पानी से घिर गए हैैं। दारागंज, छोटा बघाड़ा, नेवादा, गंगा नगर में तो घरों में भी पानी घुसने लगा है। इसी तरह गंगा और यमुना के किनारे बसे लगभग 100 गांव भी बाढ़ की चपेट में हैैं। लगभग दो लाख आबादी बाढ़ की चपेट में आ चुकी है।

डीएम का यह है कहना। 

बाढ़ के खतरे को लेकर तटीय क्षेत्रों में अलर्ट जारी करते हुए नावें व स्टीमर लगा दी गई हैैं। मजिस्ट्रेट भी स्टाफ के साथ तैनात किए गए हैैं। बाढ़ राहत शिविरों को सक्रिय कर दिया गया है। वहां रुकने और भोजन की व्यवस्था हो गई है।   संजय कुमार खत्री, डीएम






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