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UP-Muradabad भ्रष्टाचार ने शमशान से शवों को घर घर पहुंचाया।

 शर्मनाक शवों को श्मशान या कब्रिस्तान ले जाते हैं लेकिन भ्रष्टाचार ने शमशान से शवों को घर घर पहुंचाया। 

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RAVINDRA YADAV LUCKNOW 05:01:2021


मुरादनगर श्मशान घाट कि छत ही नहीं ढही है ढहा है विश्वास भी 5 जनवरी 2021 ग़ाज़ियाबाद के मुरादनगर श्मशान घाट में छत गिरने से 25 लोगों से ज़्यादा की मौत हो गई और लगभग सौ लोग बुरी तरह से घायल हो गए । 

यह छत कोई छत सालों पुरानी नहीं थी । इसे बने हुए अभी सिर्फ़ दो महीने हुए थे । यह नई छत थी जो लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारणों से ढह गई । इतने लोगों का मरना, एक साथ मरना और श्मशान घाट में मरना मेरी याद में यह ऐसी पहली दुर्घटना है । सारी दुनिया में शवों को श्मशान या कब्रिस्तान ले जाया जाता है लेकिन मुरादनगर के श्मशान से ये शव घर लाए गए । सारी दुर्घटना कितनी रोंगटे खड़े करनेवाली थी , इसका अंदाज़ हमारे टीवी चैनलों और अख़बारों से लगाया जा सकता है । जिस व्यक्ति की अंत्येष्टि के लिए लोग श्मशान में जुटे थे , उसका पुत्र भी दब गया । उसके कई रिश्तेदार और मित्र , जो उसके अंतिम संस्कार के लिए वहाँ गए थे , उन्हें क्या पता था कि उनके भी अंतिम संस्कार की तैयारी हो गई है । जो लोग दिवंगत नहीं हुए , उनके सिर फूट गए , हाथ - पाँव टूट गए और यों कहें तो ठीक रहेगा कि वे अब जीते जी भी मरते ही रहेंगे । 

 दो लाख रुपये मुआवजा या मजाक।

मृतकों को उत्तरप्रदेश की सरकार ने दो लाख रुपये की कृपा राशि दी है । इससे बड़ा मज़ाक़ क्या हो सकता है किसी परिवार का कमाऊ मुखिया चला जाए तो क्या उसका गुजारा एक हजार रुपये महीने में हो जाएगा दो लाख रुपये का ब्याज उस परिवार को कितना मिलेगा। 

 सहानुभूति से काम चलाया। 

राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने हताहतों के लिए शोक और सहानुभूति बताई , यह तो ठीक है लेकिन उन्हें उनकी ज़िम्मेदारी का भी कुछ एहसास है या नहीं श्मशान - घाट की वह छत मुरादनगर की नगर निगम ने बनवाई थी ।




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