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शिवपाल कहा - मेरी मंशा स्पष्ट होने के बावजूद भी आगे नहीं बढ़ रही गठबंधन की बात। Akhilesh-Shivpal-Singh-Yadav-Samajwadi-Party

 गठबंधन पर बोले शिवपाल कहा - मेरी मंशा स्पष्ट होने के बावजूद भी आगे नहीं बढ़ रही बात। 

Ravindra Yadav 6 एएम न्यूज़ टाइम्स लखनऊ 04:12:2020

 


शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि प्रसपा का स्वतंत्र अस्तित्व बना रहेगा और पार्टी विलय जैसे एकाकी विचार को एक सिरे से खारिज करती है. अपने पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को यह विश्वास दिलाती है कि उनके सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। 

लखनऊ। प्रादेशिक चिकित्सा प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के नेता शिवपाल सिंह यादव ने ऐलान किया है कि 24 दिसंबर से पाार्टी पूरे पदेश में पदयात्रा करेगी। शिवपाल ने कहा कि अलग-अलग माध्यमों से और संवाद के विभिन्न मंचों पर सैकड़ों बार मैंने यह बात कही है कि समाजवादी धारा के सभी लोग एक मंच पर आएं और एक ऐसा तालमेल बने, जिसमें सभी को सम्मान मिल सके और प्रदेश का विकास हो सके। आप सभी इस बात के साक्षी रहे हैं। जहां तक समाजवादी पार्टी  का प्रश्न है, अब तक मेरे इस आग्रह पर पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई है और न ही इस विषय पर मेरी समाजवादी पार्टी के नेतृत्व से कोई बात हुई है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मेरी मंशा स्पष्ट होने के बावजूद बात आगे नहीं बढ़ पा रही है।

उन्होंने कहा कि प्रसपा का स्वतंत्र अस्तित्व बना रहेगा और पार्टी विलय जैसे एकाकी विचार को एक सिरे से खारिज करती है। अपने पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को यह विश्वास दिलाती है कि उनके सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मैं एक बार फिर गैर भाजपा दलों की एकजुटता का आह्वान करता हूं। 


24 दिसंबर से गांव-गांव पहुंचे प्रसपा जन के पांव अभियान। 

शिवपाल ने कहा कि हम लगातार संगठन को मजबूत करने पर कार्य कर रहे हैं।  24 दिसम्बर से प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में गांव-गांव पद यात्रा अभियान चलाएगी। इस पद यात्रा का उद्देश्य प्रदेश के हर गांव में पहुंचना और पार्टी के विचारों को जनता तक पहुंचाना है। पार्टी इस संकल्प को 'गांव-गांव पहुंचे प्रसपा जन के पांव' के नारे के साथ आगे बढ़ाएगी। 

जनता में बीजेपी सरकार के खिलाफ बहुत गुस्सा। 

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने गांव, गरीब, किसान, पिछड़े, दलित, व्यवसायी, मध्यवर्ग और युवाओं को सिर्फ छला है. सरकार शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान, रोजगार और इलाज उपलब्ध करा पाने में पूर्णतया नाकामयाब रही है. बेटियों को सुरक्षा और न्याय न दे पाने की वजह से जनता में सरकार के खिलाफ बहुत गुस्सा है.

कृषि विरोधी बिल पर करें पुनर्विचार। 

कृषि विरोधी बिल के खिलाफ दिल्ली आ रहे पंजाब व हरियाणा के किसानों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है, कड़ाके की सर्दी के बावजूद उन पर आंसू गैस, लाठियां व वॉटर कैनन चलाया जा रहा है. अन्नदाताओं पर ऐसा अमानवीय अत्याचार करने वालों को सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं है. लोकतंत्र में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, यही लोकतंत्र की ताकत है. बड़ी सी बड़ी समस्याओं को बातचीत के द्वारा हल किया जा सकता है. जन आकांक्षा के दमन और लाठीचार्ज के लिए लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है. इसके मद्देनजर किसानों और विपक्ष की आम सहमति के बिना बनाए गए, इन कानूनों पर केन्द्र सरकार पुनर्विचार करे.

बीजेपी में सबसे ज्याद किसान परेशान

भाजपा सरकार में सबसे परेशान किसान हैं. उन्हें फसल का लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा है. पिछले साल जो धान 2400 रुपये क्विंटल बिका था वह इस बार 1100 से 1300 रुपये के बीच बिक रहा है. गन्ने का समर्थन मूल्य पिछले कुछ सालों से एक रुपया भी नहीं बढ़ा है और अभी तक पिछले साल के गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हुआ है. आज अगर चौधरी चरण सिंह, लोहिया और समाजवादियों की विरासत सत्ता में होती तो अन्नदाताओं के साथ इतना बड़ा छल नहीं हो सकता था.

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