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जनता का वोट तेजस्वी को, चुना आयोग ने सत्ता सौंपी नीतिश को देखें बिहार के वोटों के आंकड़ों की सच्चाई। बिहार का असली बाजीगर  तेजस्वी 

#Subscribe to www.6amnewstimes.com हिन्दी दैनिक समाचार पत्र लखनऊ से प्रकाशित । 9415461079 

RJD ; पिछली बार से 4.75 फीसदी यानी 27 लाख 40 हजार 733 वोट ज्यादा मिले। BJP को इस बार 11 लाख 06 हजार 607 कम वोट मिले हैं।

बिहार चुनावी का नतीजों की कहानी तो यही है कि मोदी, नीतीश कुमार, सहित दर्जनों दिग्गज नेताओं की अगुआई में एनडीए को बहुमत मिल और महागठबंधन सत्ता से दूर हो गया। लेकिन नतीजों के आंकड़ों को खंगालने पर कई दिलचस्प आश्चर्यजनक बातें सामने आ रही हैं।  

तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी)  भले ही सत्ता तक नहीं पहुंचा पाई , लेकिन तेजस्वी यादव ने राजनैतिक रण कौशल से ये साबित कर दिया की वोटों और सीटों के मामले में बीजेपी के राष्ट्रीय स्तर के दिग्गज नेताओं पटखनी जरूर दे दी है।


बिहार 2015 / 2020 मे किसे कितना फायदा-किसे कितना नुकसान। 

दोनों चुनावों की तुलना करें तो तेजस्वी की पार्टी आरजेडी वोट शेयर के मामले में काफी फायदे में रही है और उसे पिछली बार से 4.75 फीसदी यानी 27 लाख 40 हजार 733 वोट ज्यादा मिले। वहीं, बीजेपी ने 2015 के मुकाबले 21 सीटें अधिक हासिल की हैं, लेकिन वोट शेयर के मामले में उसे नुकसान हुआ है। बीजेपी को इस बार 11 लाख 06 हजार 607 कम वोट मिले हैं। वोट शेयर और सीटों के मामले में जेडीयू काफी नुकसान हुआ है। 2015 के मुकाबले उसे 28 कम सीटें मिली हैं तो वोट शेयर भी कम हुआ है। वहीं, कांग्रेस का वोट शेयर काफी बढ़ा पर उसे भी सीटों के मामले में नुकसान हुआ है। पिछली बार कांग्रेस को 27 सीटें मिली थी, जबिक इस बार उसके 19 प्रत्याशी ही जीत सके। 

तीन चरणों में 243 सीटों पर हुए चुनाव में एनडीए को 225 सीटें हासिल हुईं तो महागठबंधन ने 110 सीटों के साथ कड़ी टक्कर दी। एनडीए के सहयोगी दलों की बात करें तो बीजेपी को 74, जेडीयू को 43, वीआईपी और हम को 4-4 सीटें मिली हैं। सबसे बड़ी पार्टी आरजेडी है, जिसे 75 सीटें मिली हैं। कांग्रेस को 19 और वाम दलों को कुल 16 सीटें मिली हैं।


किस पार्टी को कितने वोट, फिर भी बहुमत किसकी ओर। 

वोट शेयर की बात करें तो सबसे अधिक 23.1 फीसदी मत आरजेडी को मिले हैं। कुल 97 लाख 36 हजार 242 लोगों ने ईवीएम में लालटेन के सामने का बटन दबाया। वहीं, इस मामले में बीजेपी दूसरे नंबर पर है जिसे 19.46 फीसदी लोगों ने वोट दिया यानी 82 लाख 1 हजार 408 वोटर्स ने कमल का बटन दबाया। सातवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे नीतीश कुमार की पार्टी को 15.4 फीसदी यानी 64 लाख 84 हजार 414 लोगों ने वोट दिया। कांग्रेस को 9.5 पीसदी मतदाताओं यानी 39 लाख 95 हजार 3 वोटर्स ने वोट दिया। एलजेपी 5.66 फीसदी (23 लाख 83 हजार 457) वोटों के साथ 1 सीट पर ही जीत दर्ज कर पाई वहीं एआईएमआईएम 1.24 फीसदी यानी 5 लाख 23 हजार 279 वोट लेकर 5 सीटें जीत गई। अन्य के खातों में 18.8 फीसदी वोट गए हैं। 


बात करें कि 2015 में किसे कितना वोट मिला। 

पिछले विधानसभा चुनाव के आकंड़ों पर नजर डालें तो तीसरे नंबर पर रही बीजेपी वोटशेयर के मामले में सबसे आगे थी। उस चुनाव में बीजेपी को सीटें तो महज 53 मिली थीं, लेकिन उसे 24.42 फीसदी यानी 93 लाख 08 हजार 15 मतदाताओं ने पसंद किया था। वहीं, आरजेडी को 18.35 फीसदी वोट मिले थे। कुल 69 लाख 95 हजार 509 लोगों ने वोट दिया था। इसके अलावा जेडीयू को 16.83 फीसदी और कांग्रेस को 6.66 फीसदी वोट मिले थे। तब निर्दलीयों के खातों में 9.39 फीसदी वोट गए थे।

महागठबंधन में किसे कितनी सीटें?

विपक्षी महागठबंधन में आरजेडी को 75, कांग्रेस को 19, भाकपा माले को 12 और भाकपा एवं माकपा को दो-दो सीटों पर जीत मिली। इस चुनाव में एआईएमआईएम ने पांच सीटें और लोजपा एवं बसपा ने एक-एक सीट जीती है। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीतने में सफल रहा है।


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